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उड़ान

तेरी उड़ान तेरे हौसलों की हीं तरह बरक़रार रखना,मेरे दोस्त
रास्ते में सामना बिजली से भी हो सकता है 
कामयाबी की तरफ कदम रखना संभाल के 
की आदमी जमीं पे रौशनी से भी गिर सकता है 

दिल ऐ बेजार

ये बेचैनी ,ये खयाल ,ये गुमसुम सा दिल आज मेरा क्यों है 
उसे कंही खो ना दु... दिल में ये सवाल क्यों है 
अभि तो उसका हाँथ मेरे हाँथो मे है ,अभि तो मेरी आँखों को उसका दीदार भी है 
अभि अभि तो सिने से उसको लगाया मैंने ...... अभि तो उसके आने का इन्तजार भी है 
अभि तो मिली हूँ जिंदगी से एक अरसे के बाद ,अभि तो मेरी साँसों पे उसे इख्तियार भी है 
वो जो देखने की उसको एक आदत सी बना ली मैंने ,ये आदत ही जान लेगी ये एहसास भी है 
ये जानते थे कि एक रोज वो चला जाएगा.... फिर भी दिल उस्से लगाने कि खता की है 
कुछ लम्हे ही जी लु तो काफी है मोहब्बत में ...... कल का अंजाम सोच के ऐ दिल,तु अभि से इतना बेजार क्यों है 


खनक .....

पैरो को पायल की खनक चाहिए थी घुंगरू बंधे तो हम कोठो के हकदार हो गए
 मुस्कराहट ने ही तो रख्ही है अब तक आंसुओ कि लाज वरना टुकड़ो में तो कई बार तार तार हो गए
दिल ए हाल पे हमको आ ही जाती है हंसी
की रिश्ते  निभाते निभाते ही हम नीलाम हो गए .......

फलसफा...जिंदगी का !

बड़ी देर तक जलाया है अरमानों को मशालों की तरह
कैसे बदलते है तकदीरों को कोई बता तो दे
सहमा है मेरा दिल इस दुनिया के रंग से
ए वक़्त तेरे साथ चल सकु कुछ ऐसा फलसफा तो दे .....


पत्थर ...

बड़ी देर तक महफ़िल में मुस्कुराये है हम अब जो आये है तन्हाई में तो आंसू छलक गए
मासूम से दिल  को मारे एक जमाना सा हो गया ,आते ही ख्याल दिल पर कई शोले गुजर गए
अब हममे और ज़माने में फर्क कन्हा है
वो रखते है कांच का दिल और हम  पत्थर से बन गए

तजुर्बा

सब कुछ खोकर ही तो ये तजुर्बा हुवा ,खुद अपना भी किसी का कँहा अपना हुवा
बदनाम तो सीता भी थी तो रकीब मेरा हाल पूछता है क्यों
कौन है ऐसा यंहा जिसका दामन कभी न मैला हुवा
फर्क बस इतना है , मै देख कर चुप रही और वो जानकर अंजा
उसके सामने मेरे मुक्ददर का जब फैसला हुवा
अरसे के बाद ठाना की जिंदगी जीना है आज से
पता चला की उम्रर गुजर गयी और ये हौसला हुवा

बेजुबां..

ए खुदा आंसुओ को जुबां देदो ,बेजुबां दिल की गवाही हम सुनाये कैसे
चोट सीने पे हो तो सह भी जाए.… टुकड़े दिल के कोई दिखाए कैसे
ए मोहब्बत तेरी  तक़दीर पे आई है हंसी ,
खंजर किसी अपने ने चलाया है बताये कैसे…।

वजूद.......

लहू-लुहान है मेरा वजूद तेरे शहर मे कंही
छलकते आंसुओ का कोई हिसाब तो हो
धड़कने चलती है तो लोग समझते है की जिंदा हूँ
बिखरती साँसों पे भी काश थोड़ा ऐतबार तो हो
मुझसे मत पूछ मेरी कहानी क्या थी.…ए जिंदगी तुझको ,तुझपे इख्तियार तो हो
चल मै  हार जाऊं एक और सबब जिंदगी का
शर्त बस इतनी है मेरे हारने की कीमत तेरे लिए प्यार तो हो

दर्द

`मुझे देखकर  मेरे दर्द क अंदाजा ना हूवा  उन्को ....
पता नहीं…रौशनी कम थी वंहा या एक्टर हम कमाल के थे "

हसरतें .......

दिल कि हसरतो को दिल में दफना दिया हमने
जो सपने देखे आँखों ने ,आँसुओ में बहा दिया हमने
रस्मो कि दिवार तोडना मुश्किल लगा
दिल तोड़कर तुम्हारा लो खुद को कातिल बना दिया हमने . .............

आज कल...

अपने जस्बात जाताना कितना मुश्किल है आज कल
जन्हा  कहने कि तमन्ना थी वंहा इनका जिक्र फसानों  कि तरह आये  है
हंसी आती है जिंदगी के इस मोड़ पर
जब दोस्तों कि जरुरत थी तो  जहन में सारे नाम बेगानो कि तरह आये है
दर्द सबको है बस जताने का अंदाज अलग रहा
कुछ ने इससे मान लिया किस्मत समझ कर तो कुछ बगावत कर मैखाने कि तरफ आये है