प्यार क्या है .... ???

प्यार बेबसी है कंही तो प्यार बेरुखी  कंही'
प्यार उसे गले लगाना भी  है तो प्यार बिछड़ जाना  है कंही
प्यार आँखों में खो जाने का नाम है ..तो प्यार बिना उम्मीद भी उसका  हो जाने का नाम है
प्यार रूठने मनाने का सिलसिला है कंही तो प्यार बंदिशों में जुड़ा अरमां है कंही
प्यार इन्तजार है कंही तो प्यार इम्तिहान है कंही
प्यार  ख़ुशी का नाम है तो ...कंही प्यार बेबस आँखों की नमी का नाम है
अभी सिखने है प्यार के अंदाज कई
सुना है प्यार जिंदगी भी है तो  प्यार बंदगी है कंही
प्यार उसे टूटे दिल से चाहना भी है.... प्यार खुद से मिलनेवाला आइना भी है
 लोग कहते है प्यार जुदा होना भी है ..... अब  तक यही समझा है  प्यार खुदा भी है
प्यार बिखर कर उसे जोड़ना भी है ... तो प्यार खुद अपना दिल तोडना भी है




फलसफा...जिंदगी का !

बड़ी देर तक जलाया है अरमानों को मशालों की तरह
कैसे बदलते है तकदीरों को कोई बता तो दे
सहमा है मेरा दिल इस दुनिया के रंग से
ए वक़्त तेरे साथ चल सकु कुछ ऐसा फलसफा तो दे .....


पत्थर ...

बड़ी देर तक महफ़िल में मुस्कुराये है हम अब जो आये है तन्हाई में तो आंसू छलक गए
मासूम से दिल  को मारे एक जमाना सा हो गया ,आते ही ख्याल दिल पर कई शोले गुजर गए
अब हममे और ज़माने में फर्क कन्हा है
वो रखते है कांच का दिल और हम  पत्थर से बन गए

महफ़िल


वो जिनकी मोहब्बत में जिंदगी गुजर गयी वो बैठे है हमसे युँ नजरो को चुरा कर
दिल तोड़ने वाले तुझे क्या सजा दूँ बता दिल खुद अपना दुखाया है हमने किसी पत्थर से लगा कर
मेरी वफ़ा का तेरी नजरो में कोई मोल था ही कन्हा
एक दांव लगा ले तुभी मुझे महफ़िल में बिठा कर .......

तजुर्बा

सब कुछ खोकर ही तो ये तजुर्बा हुवा ,खुद अपना भी किसी का कँहा अपना हुवा
बदनाम तो सीता भी थी तो रकीब मेरा हाल पूछता है क्यों
कौन है ऐसा यंहा जिसका दामन कभी न मैला हुवा
फर्क बस इतना है , मै देख कर चुप रही और वो जानकर अंजा
उसके सामने मेरे मुक्ददर का जब फैसला हुवा
अरसे के बाद ठाना की जिंदगी जीना है आज से
पता चला की उम्रर गुजर गयी और ये हौसला हुवा

भाभी....

माँ के बाद तुम्हारे हाथो से कभी खाए थे निवाले
माँ के बाद तुम्हे चाहेंगे दिल आयी थी सदा
कुछ खताओं की सजा तुमसे जुदाई होगी
ऐ खुदा  इस दर्द को हम कैसे संभाले
जैसे जैसे तेरा दामन इन हाथो से छूटा है
दिल कई टुकड़ो में मर मर के जिया है
भाभी आज तुमसे मिलो का फासला है बहोत
कोई लम्हा नहीं जब तुम्हे याद करके आंसू ना बहा है.………।

तवायफ....

एक तमाशा भरी जिंदगी बन गयी,
क्या थे पहले कभी आज क्या बन गयी…
एक खिलोने से ज्यादा मै  कुछ भी नहीं
आज तवायफ सी मेरी हया बन गयी
दिल पर बस बोझ अब इन् साँसों का है
पर धड़कने ही मेरी बेड़िया बन गयी
इस दुनिया के साथ हम चल न सके.…
जिंदगी की मेरे ये खता बन गयी
दर्द दिल का बयां हमसे होता नहीं
कोई पत्थर की सहमी नीशा बन गयी
जो भी चाहे मुझे आकर लूट ले
अब तो बदनाम सी मै एक दास्तां बन गयी....

कब तक जिंदगी यूँही किश्तों में जिएंगे हम

कब तक जिंदगी यूँही किश्तों में जिएंगे हम ,किसी ना किसी को को कभी तो आवाज उठानी होगी
बहोत सह लिया है अब ना आजमाओ हमे … कभी ना कभी कीमत तुमको भी चुकानी होगी



"अभि " ..

कुछ रिश्तो को नाम नहीं मिलते बस दिल उनकी  खुशियो की दुवा माँगता  है अक्सर,
सुकूँ सा मिला है दिल को एक अरसे के बाद जबकि दिल भी नहीं जानता दिल क्या चाहता है अक्सर !…







इंतजार ...

आज तक उसका नाम जहन में  है जिसकी दुनिया से कब के जा चुके है हम 
लोग कहते है वक़्त भुला देता है हर गम,,,,इस इंतजार में खुद को भुला चुके है हम

बेजुबां..

ए खुदा आंसुओ को जुबां देदो ,बेजुबां दिल की गवाही हम सुनाये कैसे
चोट सीने पे हो तो सह भी जाए.… टुकड़े दिल के कोई दिखाए कैसे
ए मोहब्बत तेरी  तक़दीर पे आई है हंसी ,
खंजर किसी अपने ने चलाया है बताये कैसे…।

आइना

आइना देखा ही नहीं सालो से तुम्हे आइना मानकर
अब जो आये है आईने के सामने तो पूछता है कौन हूँ  मैं

रिश्ते....


चले थे जिनके भरोसे पे हम दुनिया को छोड़ कर ,ना जाने कैसे वो रिश्ते राहों में छूट गए
धड़कनो पे जिनको इख्तियार दिया, कांच की तरह थे वो रिश्ते जो हाथो से छूट गये
 हमे आया ही नहीं रिश्ता निभाना शायद ,वरना उम्र इतनी छोटी भी नहीं थी यकीं के मेरे
सबब दिया है जिंदगी ने कुछ आज  जिंदगी को छीन कर हमे

वजूद.......

लहू-लुहान है मेरा वजूद तेरे शहर मे कंही
छलकते आंसुओ का कोई हिसाब तो हो
धड़कने चलती है तो लोग समझते है की जिंदा हूँ
बिखरती साँसों पे भी काश थोड़ा ऐतबार तो हो
मुझसे मत पूछ मेरी कहानी क्या थी.…ए जिंदगी तुझको ,तुझपे इख्तियार तो हो
चल मै  हार जाऊं एक और सबब जिंदगी का
शर्त बस इतनी है मेरे हारने की कीमत तेरे लिए प्यार तो हो

दस्तूर

"बुनियाद ढ़य चूकी है बिखरना अभी भी बाकी है,ये जो थोड़ी सि जींदगी है तेरे साथ काफी है 
खुशियाँ हि तो बस प्यार का पैमाना नही  होती,आंसुओं मे भी  तो मोहब्बत झलक जाती है 
ज़माने से कह दो दस्तूर बदल डाले अब.......... हमसे टकराने की अब आंधियो की बारी  है …"

दुवा

"खुद अपने ही हाल पर हसने लगे है हम.… और लोग कहते है कि सिर्फ़  पीने से नशा होता है
क्यों जाते है लोग मंदिरो मे खुदा  को ढुंढने,,जंहा बस्ता है प्यार हर उस रिश्ते मे खुदा होता है
मुश्किलें काली रातों मे अमावश हो भले…ये भी सच है कि हर रात के बाद सुबह होता है
झोली फैला कर क्या मांगे खुदा से… .जब जब आता है तेरा नाम लब पर खुद वो दुवा होता   है "

दर्द

`मुझे देखकर  मेरे दर्द क अंदाजा ना हूवा  उन्को ....
पता नहीं…रौशनी कम थी वंहा या एक्टर हम कमाल के थे "

इम्तिहान

जिंदगी अब नेरा इम्तिहान और मत ले ,बस कर दे रिहा मुझे  इन साँसों कि डोर से 
यूं गिर के सम्भलना,सम्भलकर चलना अब और नहीं होता,,
बहोत दूर आ गयी हूँ चलते चलते … मुझे एक और मुश्किल सफ़र और मत दे
हर रोज जीने कि वजह ढूंढ लेते थे जो आज उसके आसुओं ने वो वजह ले ली मुझसे 
अकेले हो गए है ऐसे कि अपनी ही लाश अपने काँधे पे ढ़ो रहे है ...................

हसरतें .......

दिल कि हसरतो को दिल में दफना दिया हमने
जो सपने देखे आँखों ने ,आँसुओ में बहा दिया हमने
रस्मो कि दिवार तोडना मुश्किल लगा
दिल तोड़कर तुम्हारा लो खुद को कातिल बना दिया हमने . .............

खामोशि...

हालांकि इस दिल की जरुरत थोड़ी थोड़ी है बस तेरे साथ की तमन्ना पर मेरा इख्तियार नहीं होता 
तू साथ तो जरूर है फिर भी तेरा इन्तजार रहता है आज कल ,ये थमा हुआ वक़्त क्यों अब पार नहीं होता 
वो लम्हे जो तेरे बिन मेरे जिन्दगी में आये ..तोड़ देंगे मुझे इतना ए ऐतबार नहीं होता 
नमी सी आ गयी आँखों में जो गुजरते वक़्त में ढूंडा तुझे पर क्यों  आन्सुऒ पे दिल का इख्तियार नहीं होता 
सोचते है खुद को बदल देंगे ,पर बदले बिना रिश्ता निभाना क्या साकार नहीं होता 
अल्फाज नहीं आज तुमसे  कुछ कहने के लिए पर खामोशियो का मतलब सिर्फ तकरार नहीं होता